पिछले जन्म की यादों में प्रवेश कठिन नहीं है। सिर्फ मन का एकाग्र होना जरूरी है। रात के समय किया गया प्रयोग बहुत उपयुक्त है। सोने से पहले सिर्फ दस मिनट का समय लगाएं। ध्यान मुद्रा में बैठें और आंखें बंद कर उल्टे क्रम में अपनी दिनचर्या को याद कीजिए। याद करें कि अभी ध्यान में बैठने से पहले क्या किया था? उसके बाद पिछली घटना को याद करें। इसी क्रम को कायम रखते हुए अपनी सभी यादें और क्रियाएं याद करते रहें। धीरे-धीरे जब यह प्रक्रिया सुचारु रूप से चलने लगेगी, तो अवधारणा शक्ति बढ़ने लगेगी। अतीत की घटनाएं याद करते-करते आप स्वयं पिछले जन्म में प्रवेश करने लगेंगे।
ध्यान के अभ्यास में जो पहली क्रिया संपन्न होती है, वह भूलने की, बेकार यादों को खाली करने की होती है। जब तक दिमाग बेकार ज्ञान, तर्क और यादों से खाली नहीं होगा, नीचे दबी हुई पुरानी बातें नहीं याद आएंगी। इन बातों का ज्ञान होते ही पूर्व जन्म का पता चलने लगता है। सुबह और शाम के समय दोनों वक्त 20-20 मिनट का ध्यान काफी है। कोई बात परेशान कर रही हो, कोई उलझन हो या मन भटक रहा हो, तो ध्यान न करें। यह प्रयोग किसी योग शिक्षक से सीखकर भी कर सकते हैं। तकनीकी भाषा में इस पद्धति को ‘विपश्यना’ कहते हैं। अपने अनुभव को, मन में आई बातों को गलती से भी किसी आम आदमी को न बताएं।